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म्युनिक में आयोजित अवकाश मेला


Leisre time games and holidays have an important place in the lives of germans. Special trade fair in this field had a lot of new products and services to offer.


ਛੁੱਟਿਆਂ ਮਨਾਨਾ ਜਰਮਨ ਲੋਕਾਂ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਪਸੰਦੀਦਾ ਸ਼ੌਕ ਹੈ. ਇਸਨੂੰ ਵਧ ਤੋਂ ਵਧ ਮਜੇਦਾਰ ਬਣਾਓਣ ਲਈ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਤਰੀਕੇ ਈਜਾਦ ਕੀਤੇ ਗਏ ਹਨ. ਪੜੋ ਇਸ ਵਿਸ਼ੇ ਤੇ ਆਯੋਜਿਤ ਹੋਏ ਇੱਕ ਵਿਆਪਾਰ ਮੇਲੇ ਬਾਰੇ.




म्युनिक में 18 से 22 फरवरी तक छुट्टियां मनाने और ढेर सारे मनपसन्द खेलों पर आधारित एक व्यापार मेले का योजन हुआ। इसमें घुड़सवारी, पानी के खेल (तरह तरह की किश्तियां चलाना, सर्फिंग आदि), साइक्लिंग, स्केटिंग से लेकर पर्यटन तक की हज़ारों कंपनियों ने हिस्सा लिया। विषयों के अनुसार मेले को सात हालों में बांटा गया था। वाटर स्पोर्ट्स में तरह तरह मोटर बोट से लेकर, कानू, कयाक, विण्ड सर्फिंग और गोताखोरी के बहुत सारे स्कूलों और डीलरों ने हिस्सा लिया। हाल के अन्दर ही बड़े बड़े पूल बनाकर इन चीज़ों का प्रदर्शन किया जा रहा था और लोगों को इनमें भाग लेने के लिये आमन्त्रित किया जा रहा था। घुड़सवारी में यूरोप के घोड़ों की विभिन्न नस्लें पेश की जा रही थीं और घुड़सवारी के कई स्कूलों द्वारा टिप्स दी जा रही थीं। कहा जाता है कि जर्मनी में घुड़सवारी का बाज़ार गाड़ियों के बाज़ार से भी बड़ा है। घुड़सवारी का अर्थ केवल घुड़दौड़ नहीं बल्कि मौजमस्ती के लिये आम लोगों द्वारा घोड़ों का उपयोग है। बल्कि घोड़ों वाले तांगे बनाने वाली लगभग पचास कंपनियां जर्मनी में अभी भी जीवित हैं। इन्हें खींचने के लिये उत्तरी जर्मनी की एक नसल बहुत लोकप्रिय है।



कैंपिंग बसों के लिये भी एक अलग हाल था। इनमें कैंपिंग बसें बनाने वाली अनेक छोटी और बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया। फोल्कवेगन से लेकर फियेट, मर्सीडीज़, फोर्ड आदि की गाड़ियों को आकर्षक कैंपिंग बस में बदलने का कार्य ये कंपनियां करती हैं। इन बसों में रसोई, टॉयलेट, बाथरूम, सोफा, फ्रिज, बेड और स्टोर सब कुछ होता है। इनकी कीमत तीस से साठ हज़ार यूरो तक होती है। एक सस्ता विकल्प कैंपिंग ट्रेलर है जो किसी भी गाड़ी के पीछे लगाया जा सकता है। यह काफ़ी बड़ा भी होता है। इनके अलावा छुट्टियों के लिये बड़े बड़े टेंट भी प्रदर्शित किये गये। इस तरह की छुट्टियां मनाने वाले लोग अधिकतर पचास से अधिक आयु के होते हैं जिनके पास पैसा भी होता है और समय भी। पर अब औसत आयु कम हो रही है। अब तीस और चालीस वर्ष के बीच कि आयु वाले बहुत से लोग भी इस तरह की जीवनशैली अपना रहे हैं। जर्मनी में वार्षिक लगभग चार सौ ऐसी कैंपंग बसें बेची जाती हैं।



पर्यटन को भी दो हाल समर्पित थे। इनमें बायरन और आस पास के शहरों, क्षेत्रों से लेकर यूरोप के कई देशों और कई दूर दराज देशों के पर्यटन विभागों ने हिस्सा लिया। भारत के 'अतुल्य भारत' का भी अपना स्टाल था। इटली, चेकस्लोवाकिया, पोलैण्ड आदि देशों के तो हर प्रान्त का अलग स्टाल था। वहां न केवल केवल ढेर सारे फ्लायर आदि दिये जा रहे थे, बल्कि वहां की वाइनें, पनीर और अन्य वस्तुयें आजमाने के लिये और खरीदने के लिये उपलब्ध थीं।

इस मेले में बच्चों से लेकर बूढों तक हर किसी के लिये बहुत कुछ था। कुल मिलाकर करीब एक लाख लोग इसे देखने आये।

http://www.free-muenchen.de/



2010-04-16 05:10:43  print
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