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फोन कॉल का वो आखिरी 1 सैकेण्ड


Mr. Richard Thiess from criminal police of Munich tells about a real murder case he handled where the suspect had taken care to create a perfect alibi...well....almost.

http://picasaweb.google.de/rajneesh.mangla/wZKhjF#5499069928639963634

15 मार्च 2002, शुक्रवार को मैं एक अच्छा सप्ताहान्त बिताने के मूड में था। बहार आने को थी और मुझे हत्या आयोग में आए अभी कुछ महीने ही हुए थे और पिछले महीनों में छोटे मोटे केसों को छोड़कर कुछ खास नहीं हुआ था। पर अभी सुबह के सवा दस ही बजे थे कि फोन द्वारा एक छोटे से फ्लैट में एक औरत की लाश मिलने की खबर आई। मैंने तुरन्त साथियों को, वकील को और सुराग ढूंढने वालों को सूचित किया और फौरन वहां चला गया। यह मेरा पहला केस था जिसमें सचमुच हत्या कर दी गई थी। करीब बीस मिनट बाद मैंने जो नज़ारा देखा, वह नरम दिल वालों के लिए नहीं था। चौथी मंज़िल पर छोटे से फ्लैट में एक छोटी से कद सी औरत की लाश खून से लथपथ फर्श पर पड़ी थी। उसका सर किसी भारी चीज़ से बार बार वार करने पर इतना विकृत हो गया था कि उसकी उम्र का अन्दाज़ा लगाना मुश्किल था। उसे काफ़ी बेरहमी से मारा गया लगता था। कमरे में गन्दगी का राज था। कोई डेढ सौ ब्राण्डी की बोतलें चिपचिपे फर्श पर बिखरी पड़ीं थीं। रसोई गन्दे बर्तनों और बचे हुए सड़ रहे भोजन के टुकड़ों से भरी पड़ी थी। दीवारें, पर्दे और चादरें खून के छींटों से सनी पड़ी थीं। कई महीनों से किराया न देने के कारण इस फ्लैट का बिजली और पानी पहले से कटा हुआ था। दरअसल इसका किराएदार सिगफ्रिड नामक आदमी था जो उस समय पूरी तरह नशे में धुत था। उसने लड़खड़ाती आवाज़ में ब्यान दियाः 'कल दोपहर को क्रिस्टा नामक मेरी एक जानकार औरत मेरे फ्लैट में आकर सफाई करने लगी थी। आज सुबह जब मेरी नीन्द खुली तो देखा कि वह फर्श पर मृत पड़ी है। मैंने हड़बड़ा कर इमारत के बाहर अखबार वाले को इसके बारे में सूचित किया। और उसने आगे पुलिस को सूचित किया। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि यह सब कैसे हो गया।'

हमें सन्देह था कि शायद सिगफ्रिड और मृत क्रिस्टा के बीच बहुत झगड़ा हुआ होगा। पर वह प्रश्नों के उत्तर देने की हालत में नहीं था। उसके खून में 4‰ अल्कोहल पाया गया (चार मिलीग्राम अल्कोहल प्रति ग्राम रक्त। जानकारी के लिए, जर्मनी में गाड़ी चलाने के लिए अधिकतम आधा मिलीग्राम अल्कोहल प्रति ग्राम रक्त अनुमित है)। उसे निगरानी के साथ अस्पताल भेज दिया गया।

डाक्टरों ने लाश की शिनाख्त की और सुराग पता लगाने वाली टीम ने फ्लैट की अच्छी तरह से छानबीन की। हम फ्लैट के बाहर तंग गलियारे में खड़े धीमी आवाज़ में बातें कर रहे थे। गलियारा हम लोगों के सूट केसों और बस्तों से भरा हुआ था। इमारत में इसकी खबर फैल चुकी थी। पड़ौसी बार बार हमारे पास से गुज़रते हुए फ्लैट के अन्दर की झलक पाने की चेष्टा कर रहे थे। आम अनुभवों की तरह यहां भी सभी बिना पूछे बाहर आने का कोई न कोई बहाना बता रहे थे। कोई डाक देखने बाहर निकला था, कोई कूड़ा फेंकने, कोई बिल्ली के लिए खाना लाने के लिए। उनसे थोड़ी पूछताछ करने और उनका परिचय नोट करने के बाद हम उन्हें जाने दे रहे थे। पर कुछ देर बाद हमने तीस अन्य पुलिसकर्मी बुलाकर पड़ौसियों से गहराई से पूछताछ शुरू की। उनमें से कईयों ने सचमुच गई रात को ढाई और साढे तीन बजे के बीच शोर और कुछ पीटे जाने की आवाज़ें सुनी थीं। एक ने किसी मर्द की आवाज़ भी सुनी थी जो कह रहा था 'दरवाज़ा खोलो, मुझे अन्दर आने दो।' एक ने जब वह साढे तीन बजे काम पर जा रहा था, देखा कि दरवाज़े के बाहर सामान्य तौर पर पड़ी हुई रबड़ की भारी चटाई गायब है। वह हमें बाद में तलघर की सीढियों में पड़ी मिली। इससे हमें सन्देह हुआ कि शायद कोई तीसरा व्यक्ति रात के समय में इस फ्लैट में घुसा होगा। उसने बिना चाबी के इमारत में चुपके से घुसने के लिए पहले यह चटाई दरवाज़े में फंसाई होगी। इतने में सुराग पता लगाने वाली टीम की एक सदस्य को मृत महिला की जेब में पड़ा हुआ एक पहचान पत्र मिला जिस पर एक मुस्कुराती हुई महिला की तस्वीर थी। मैंने उस पर दी गई सूचनाएं नोट कर लीं। पर हमें फ्लैट में कोई ऐसी चीज़ नहीं मिली जो मारने के लिए उपयोग की गई लगती हो। ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी भारी और तीखे सिरों वाली छड़ी से सर पर वार किए गए हों। इमारत के आस पास छानबीन पर भी ऐसी कोई चीज़ नहीं मिली। यहां तक कि कूड़े के सारे बैग भी खोल कर छान दिए गए, उनमें भी कोनियक ब्राण्डी की महंगी खाली बोतलों को छोड़कर और कुछ नहीं मिला।

फिर मैं कुछ साथियों के साथ उस पहचान पत्र में दिए गए पते पर चल दिया। औरत के बारे में इतना ही पता चला कि वह उत्तर जर्मनी से थी और कुछ सालों से म्युनिक में उस पते पर रह रही थी। उसके फ्लैट पर पहुंच कर पहले हम थोड़ी चुपचाप खड़े होकर वहां की टोह लेते रहे। वहां बिल्कुल शान्ति थी। फिर हमने फ्लैट की घंटी बजाई और दरवाज़ा खटखटाया। जब किसी ने कोई उत्तर नहीं दिया तो हमने दरवाज़ा खोलने वाली सेवा को बुलाकर ताला तुड़वाया। फ्लैट अन्दर से साधारण पर साफ सुथरा था। अल्मारियों में रखे कपड़ों और गुसलखाने में रखी चीज़ों से लग रहा था कि वहां कोई मर्द भी रह रहा है। सारे कोने छानने के बाद भी हमें उस मर्द के बारे में कोई खास सुराग नहीं मिला। सुराग वाली टीम के सदस्य ने फ्लैट से क्रिस्टा की डीएनए जांच के लिए कुछ निशान जुटाए। फिर हम फ्लैट में नया ताला लगवा कर और एक लिफ़ाफे में उस आदमी के लिए सन्देश छोड़कर चले आए। उस सन्देश में लिखा था कि पुलिस ने फ्लैट की छानबीन की है, नई चाबी पुलिस के पास है, कृपया वह पुलिस से संपर्क करे। इसी बीच डीएनए जांच द्वारा साबित हो गया कि पहचान पत्र उस मृत महिला क्रिस्टा का ही था।

इस बीच अस्पताल में सिगफ्रिड की हालत बेहतर थी और उसे अस्पताल से छोड़ दिया गया था। अगले दिन यानि शनिवार को हमने उसे अपने दफ्तर में पूछताछ के लिए बुलाया। उसके कपड़े तो पहले ही जब्त कर लिए गए थे। उन पर कोई खून के निशान साफ नज़र नहीं आ रहे थे। फिर भी उसके साथ पूछताछ से कुछ बातों का पता चला। कई बरसों से सिगफ्रिड किसी इंसान के नाम पर केवल क्रिस्टा को ही जानता था। वह कभी कभी उसके फ्लैट में आकर थोड़ी सफ़ाई करती थी। उसने हिचकिचाते हुए यह भी बताया कि वह किसी 'इंगो' नामक मर्द के साथ रह रही थी। उसे लग रहा था कि बृहस्पतिवार की रात को उसके फ्लैट में क्रिस्टा के साथ वह मर्द भी था। पर वह नशे में इतना धुत था कि विश्वास के साथ नहीं कह सकता था। क्योंकि क्रिस्टा ने उस शाम अचानक उसके फ्लैट में आकर सफाई शुरु कर दी थी और शराब की खाली बोतलें कूड़े में फेंकनी शुरू कर दी थीं, इसलिए वह नीन्द में नाराज़ होकर बेड पर लेट कर सो गया था। उसने इतनी पी रखी थी कि उसे कुछ नहीं पता चला कि उसके फ्लैट में क्या हो रहा है। हमने उसकी बातों और उसकी हालत से अन्दाज़ा लगाया कि इतने नशे में वह इतनी ताकत तो नहीं जुटा सकता था कि वह कई बार इतनी ज़ोर से उस औरत पर वार करे। न तो वह हथियार मिल रहा था और न ही महिला को मार डालने का कोई उद्देश्य समझ में आ रहा था। इसलिए फिलहाल हमने उसे एक अन्य इमारत में रहने के लिए भेज दिया क्योंकि उसका फ्लैट तो सील कर दिया गया था। अब हमने 'इंगो' का पता लगाने की सोची। इसी बीच फोन आया कि इंगो पुलिस स्टेशन चाबी लेने आया है और अपनी प्रेमिका के बारे में और छानबीन का कारण पूछ रहा है। मैंने तुरन्त उसे पूछताछ के लिए अपने दफ़्तर बुलवाया।

इसी बीच हमारे अन्य साथियों ने पता लगाया कि 'इंगो' अपनी प्रेमिका के खर्च पर क्रिस्टा के फ्लैट में रह रहा था और उसके पैसे शराब में उड़ा रहा था। इसलिए उनमें कभी कभी झगड़ा भी होता रहता है। अन्त में बृहस्पतिवार की उस रात को महिला ने तंग आकर उससे रिश्ता तोड़ने का निर्णय किया और उसे फ्लैट छोड़ कर चले जाने के लिए कहा। जब उसने विरोध किया तो वह अपने फ्लैट से चली गई और सिगफ्रिड के यहां पहुंच गई। इंगो के लिए फ्लैट छोड़ कर चले जाने का मतलब था, न तो रहने की जगह और न ही पैसे का कोई स्रोत। उसके ऊपर प्रेमिका का उसे छोडकर किसी और के पास चले जाना भी उसे गवारा न हुआ होगा। हालांकि सिगफ्रिड भी किसी तरह से सपनों का राजा होने के लायक नहीं हो सकता था, फिर भी इस ईर्ष्या को हत्या का उद्देश्य मानने से इनकार नहीं किया जा सकता था।

जब इंगो को हमारे पास पहुंचाया गया तो मैंने उसे इस कारवाई का कारण बताया और उसकी प्रेमिका के मरने पर अफसोस जताया। हालांकि वह चौंका और दुखी हुआ पर जल्द ही उसने बिना पूछे उस रात के लिए एक बहाना बताना शुरू कर दिया कि वह तो उस रात करीब दो से चार बजे तक प्रेमिका के फ्लैट से एक सेक्स हॉटलाईन को फोन कर रहा था। जब हमने उससे पूछा कि उसे बिना पूछे कहानी बताने की क्या ज़रूरत है तो वह सतब्ध रह गया। वह कहने लगा कि उसने टीवी में कई आपराधिक धारावाहिक देखें हैं जिनमें सन्दिग्ध को घटनास्थल पर उसकी उपस्थिति के बारे में पूछा जाता है। उसने यह भी कहा कि अगर हम चाहें तो पता करवा सकते हैं कि वाकई उसने वह फोन किया था या नहीं। हमें भी इसके बारे में ठीक से पूछताछ करना ज़रूरी लगा। इतना तो यकीन था कि उसकी कहानी में कोई गड़बड़ ज़रूर है। पर हमने उससे कुछ नहीं कहा। उसके ब्यान ठीक से नोट करके हमने उसे छोड़ दिया। पर न तो वह उस औरत के साथ विवाहित था और न ही उस फ्लैट के लिए उसका कोई सीधा अनुबंध था, इसलिए अदालत की ओर से उसे फ्लैट में घुसने और वहां से कोई भी सामान ले जाने की अनुमति उसे नहीं मिली। उसे कुछ दिन किसी दोस्त के पास रुकना पड़ा।

जांच से पता चला कि सचमुच उस फ्लैट के फोन से एक ऐसा नंबर (0190-xxx वाला महंगा नंबर) डायल किया गया था और संपर्क की अवधि 59 मिनट और 59 सेकण्ड थी। उसके बाद फोन कट गया था। 27 मिनट बाद फिर से वह नंबर डायल किया गया था। इस बार संपर्क 36 मिनट तक रहा। पहले वाले संपर्क से हमें आश्चर्य हुआ। क्या यह संयोग था कि फोन संपर्क पूरे घंटे से ठीक एक सेकण्ड पहले टूट गया? जांच से पता चला कि ऐसे महंगे नंबर ग्राहकों की सुरक्षा के लिए 59 मिनट और 59 सेकण्ड के बाद अपने आप कट जाते हैं। हो सकता था कि इंगो इस अवधि में फोन पर बैठा ही न हो, बल्कि उसने नंबर घुमा कर छोड़ दिया हो और फिर क्रोध या ईर्ष्या के कारण करीब तेरह किलोमीटर दूर अपने प्रतिद्वन्द्वी के फ्लैट में जाकर प्रेमिका की हत्या कर दी हो। और जब वापस आकर देखा हो कि फोन कटा हुआ है, तो इस उम्मीद में कि किसी को पता नहीं चलेगा, फोन दोबारा घुमा दिया हो। हालांकि इससे शक और बढ़ जाता है।

अब यह पता लगाना था कि उस सेक्स सेवा की किसी औरत को यह बातचीत याद है या नहीं। पूछताछ के लिए हम लोगों के लिए सामान्यत प्रतिबंधित ऐसे नंबर हमारे लिए खोल दिए गए। जब मैंने फोन घुमाया तो एक ऑटोमैटिक आवाज़ बड़े आकर्षक सपने दिला रही थी और विभिन्न नंबर दबाने का आग्रह कर रही थी। कई नंबर दबाने और बहुत सारी रिकार्ड की हुईं मादा आवाज़ें सुनने के बाद भी दस मिनट तक जब किसी से बात नहीं हो पाई तो मैंने फोन काट दिया। फिर से पांच बार फोन घुमाने पर भी जब किसी से बात न हो पाई तो हमने निष्कर्ष निकाला कि ऐसी सेवाओं के नंबर अगर घुमा कर छोड़ भी दिए जाएं तो भी उस पार किसी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अब यह पता लगाना था कि क्या एक घंटे और 27 मिनट में दूसरे फ्लैट में जाकर, हत्या करके वापस अपने फ्लैट में आना सम्भव था? हमारी जानकारी के अनुसार इंगो के पास कोई गाड़ी, मोटरसाइकल या साइकल नहीं था। यानि उसे मेट्रो, ट्राम, बस या टैक्सी से ही जाना था। टैक्सी के बारे में बहुत पूछताछ करने पर भी कुछ पता नहीं चला। अब बाकी थी मेट्रो और बस। पर क्या पहले रात वाली बस में, जो केवल एक घंटे में एक बार चलती है, फिर मेट्रो (S-Bahn) में वहां जाकर अपराध करके 87 मिनट के अन्दर वापस आना सम्भव था? अगले सप्ताह में हमने इसकी भी जांच की। एक सहकर्मी यही रास्ता अपना कर वहां गया, वहां दस मिनट तक रुका जो अपराध के लिए शायद काफी थे, और सचमुच इस अवधि में वापस आ गया। इन परिणामों के साथ हम दोबारा इंगो के पास पहुंचे। थोड़े टालमटोल के बाद उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसे इस बात से बहुत तकलीफ़ थी कि उसकी प्रेमिका उसे छोड़कर किसी और के पास चली गई है। इसलिए उसने उसे मारने का फैसला किया। उसे यकीन था कि उसका प्रतिद्वंधी हमेशा की तरह नशे में धुत होगा और उसे पता नहीं चलेगा। उसे उम्र कैद की सज़ा हुई। हत्या के हथियार के बारे में उसने कुछ नहीं बताया और न ही बहुत छानबीन से भी कुछ पता चला। पर अब यह इतना महत्वपूर्ण भी नहीं था।

श्री रिचर्ड थीस, म्युनिक आपराधिक पुलिस में हत्या आयोग के उप निदेशक के तौर पर काम कर रहे हैं। वे चालीस से भी अधिक सालों से पुलिस में हैं। उससे पहले उन्होंने कुछ वर्ष बड़ी सुपरमार्किटों में जासूस का काम किया जिनमें उनका छोटे मोटे चोरों से लेकर हट्टे कट्टे और हथियार युक्त रूसी या अलबानी ठगों से पाला पड़ता रहा। पुलिस में रहते उन्होंने बड़े बड़े गिरोहों को पकड़वाने और लाखों यूरो का माल बरामद करने में मदद की है। साथ ही वे करीब बीस सालों से एक जासूसी प्रशिक्षण देने की संस्था भी चला रहे हैं।
http://www.tektas-institut.de/

2010-08-30 09:46:17  print
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